किसी तीर्थ से कम नहीं ये जगह, आज भी मौजूद हैं हनुमानजी के पैरों के निशान

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किसी तीर्थ से कम नहीं ये जगह, आज भी मौजूद हैं हनुमानजी के पैरों के निशान

किसी तीर्थ से कम नहीं ये जगह, आज भी मौजूद हैं हनुमानजी के पैरों के निशान


New Delhi: रामदूत हनुमानजी (Lord Hanuman) के पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आओ, जानते हैं कि कहां-कहां भगवान हनुमानजी ने धरती पर अपने कदम रखे थे, जहां उनके पैरों के निशान बन गए।
जाखू
यहाँ हिमाचल के शिमला में जाखू मंदिर में हनुमानजी (Lord Hanuman) के पदचिन्ह देखे जा सकते हैं । इसके बारे में मान्यता है कि राम और रावण के युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी मूर्छित यानि बेहोश हो जाते है । तभी संजीवनी बूटी लेने के लिए हिमालय की तरफ आकाश मार्ग से जाते हुए हनुमानजी की नजर यहां तपस्या कर रहे एक यक्ष ऋषि पर पड़ी जाती है ।

बस तब से इस स्थान का नाम यक्ष ऋषि के नाम पर पड़ गया था । बाद में वक़्त बदलने के साथ इस स्थान का नाम यक्ष से याक, याक से याकू और याकू से जाखू तक नाम बदलता गया ।दरअसल हनुमानजी विश्राम करने और संजीवनी बूटी का ज्ञान प्राप्त करने के लिए जाखू पर्वत के जिस स्थान पर उतरे । वहां आज भी उनके पदचिन्ह देखे जा सकते है ।
मलेशिया
गौरतलब है कि मलेशिया के पेनांग में एक मंदिर के भीतर ही हनुमानजी के पैरों के निशान हैं।आगंतुक यानि यहाँ घूमने आने वाले लोग अपने अच्छे भाग्य के लिए इस पदचिन्ह पर सिक्के भी फेंकते हैं ।

थाईलैंड
आपको बता दें कि थाईलैंड में ‘रामकियेन’ के नाम से रामायण प्रचलित है। इसका प्राचीन नाम सियाम था । वैसे सम्राट अशोक के समय में हजारों बौद्ध भिक्षु भारत से बर्मा होकर पैदल ‘सियाम’ गए थे । वे कालांतर में वहीं बस गए थे । थाईलैंड की प्राचीन राजधानी को अयुत्थाया भी कहा जाता था । यह प्राचीन राजधानी वर्तमान की राजधानी बैंकॉक से लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित थी।
अंजनेरी पर्वत
यह पर्वत 5 हजार फुट की ऊंचाई पर बना है। आपको बता दें कि ये आस्था का ऐसा परम धाम है। जहां आज भी पवनपुत्र हनुमान के पैरो के निशान मिलते है । कहते तो ये भी हैं कि यहीं से बाल हनुमान के मुख में सूर्यदेव समा गए थे । हालांकि ये सब जानकार लोग कहते हैं कि आकाश के सूर्य को नहीं, बल्कि सूर्य नामक देवता को उन्होंने अपने मुख में समा लिया था। गौरतलब है कि यहां पांव के आकार जैसा दिखने वाला एक सरोवर भी है। जिसके बारे में ये कहा जाता है कि, ये सरोवर बाल हनुमान के पैरों के दबाव से ही बना है।

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