आकाश से बरसता पानी, मैदान पर बरसता जज्बा और मैदान के बाहर मस्ती….

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आकाश से बरसता पानी, मैदान पर बरसता जज्बा और मैदान के बाहर मस्ती....

आकाश से बरसता पानी, मैदान पर बरसता जज्बा और मैदान के बाहर मस्ती….

‘भाई साहब का मन तो हुआ था कि स्प्रिंट लगाएं, लेकिन रुक गए…’ दीपक ठाकुर अपने खास अंदाज में धनराज पिल्लै के साथ मजाक कर रहे थे. धनराज ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया, ‘मैं आगे बढ़ा, फिर समझ आया कि ज्यादा तेजी दिखाई तो हैमस्ट्रिंग जवाब दे जाएगी.’ दरअसल, ओडिशा के शहर भुवनेश्वर में बुधवार का दिन था ही ऐसा. 28 नवंबर से होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टर्फ के उद्घाटन का मौका था, जिसमें मैच था धनराज इलेवन और दिलीप टिर्की इलेवन के बीच. मैच तो खैर, जीतने या हारने का कोई फर्क था नहीं. बस, उन खिलाड़ियों को देखने की झलक मिल गई, जिन्हें देखने लोग दूर-दूर से आया करते थे.मुकाबले में आकाशदीप सिंह ने धनराज ने गेंद छीनी और हल्की सी कोहनी मारी. ऐसा अगर 20 साल पहले हुआ होता, तो शायद धनराज पिल्लै किसी भी हाल में बॉल छीनने की कोशिश करते. उनकी पहली प्रतिक्रिया आकाशदीप को स्पीड में परास्त करने की ही थी. लेकिन फिर उन्हें समझ आया कि वो 50 की उम्र पार कर चुके हैं. इसलिए खुद को रोका. हां, उनके पास पर गोल जरूर हुआ.धनराज ने याद किया कि कैसे इंटरनेशनल मैच में वो नौ नंबर की जर्सी पहन कर खेला करते थे. एक बार फिर उस जर्सी में खेलना उन्हें इमोशनल कर रहा है. इंटरनेशनल हॉकी खेले उन्हें 14 साल हो गए. इसी तरह दिलीप टिर्की, जो 40 की उम्र पार कर चुके हैं. लेकिन खुद दिलीप के मुताबिक, ‘फिट तो नहीं हूं. लेकिन पिछले कुछ दिन जमकर अभ्यास किया.’ आधे घंटे के मैच में दिलीप टिर्की और धनराज पिल्लै ज्यादातर समय टर्फ पर दिखाई दिए.दिलचस्प था दीपक ठाकुर का दो गोल करना, जो अब भी घरेलू हॉकी में इंडियन ऑयल के लिए खेलते हैं. मैच के बाद मजाक के बीच उनकी प्रतिक्रिया भी ऐसी थी, ‘ऐसा लग रहा था कि ट्रायल्स में आया हूं. दो गोल मार दिए, अब भी टीम में आ सकता हूं.’ मैच के बाद एक तरफ दीपक ठाकुर दो गोल के लिए तारीफ बटोर रहे थे, तो दूसरी तरफ श्रीजेश थे, जिन पर दो गोल हुए. वो दिलीप टिर्की को बता रहे थे कि कैसे वो उनको गोल गिफ्ट करने वाले थे, ‘अगर आपने थोड़ा लेफ्ट मारा होता, तो मैं राइट डाइव मारता. लेकिन आपने सीधा पैर पर मार दिया. ऐसे में मुझे रोकना पड़ा. वरना मैं तो एक गोल आपको गिफ्ट करना चाहता था.’इस मुकाबले में दीपक ठाकुर, विरेन रस्किन्हा, प्रभजोत सिंह, जुगराज सिंह, वीआर रघुनाथ जैसे खिलाड़ियों को दिलीप टिर्की और धनराज पिल्लै का साथ मिला. इसमें हाल ही में रिटायर हुए सरदार सिंह थे. … और उस टीम के खिलाड़ी तो थे ही, जो वर्ल्ड कप तैयारी की टीम में शामिल हैं.इन खिलाड़ियों का जज्बा ही था कि तितली साइक्लॉन की चेतावनी और तेज बारिश के बीच भी दर्शकों की ठीक-ठाक तादाद स्टेडियम में थी, जो अच्छा मैच देखने आए थे. इन खिलाड़ियों की लोकप्रियता को इसी से समझा जा सकता है कि मैच खत्म होने के डेढ़ घंटे बाद भी धनराज पिल्लै और दिलीप टिर्की प्रशंसकों के साथ फोटो, सेल्फी के लिए स्टेडियम में ही थे.मैच से पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने स्टेडियम का उद्घाटन किया. उन्होंने पूरा मैच देखा और उसके बाद खिलाड़ियों को पुरस्कार बांटे. ओडिशा ऐसा पहला राज्य है, जो किसी खेल का स्पॉन्सर है. पिछले कुछ समय मे हॉकी के तमाम बड़े इवेंट इसी राज्य में हुए हैं. नवीन पटनायक ने कहा भी भारत के लिए एक वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार करने की वजह से हर ओडिशा वासी को गर्व है.खूबसूरत स्टेडियम में फ्लडलाइट की वजह से टर्फ पर पड़े दमकते और चमकते पानी के बीच संगीत की धुन थी. वो प्रोमो थे, जो वर्ल्ड कप को प्रमोट करने के लिए तैयार किए गए हैं. लेकिन सबसे खास था उस टीम को युवा टीम के साथ खेलते देखना, जिसने करीब डेढ़ दशक पहले हॉकी प्रेमियों का दिल जीता था. खास बात थी उस मैच के बाद टीम का अंदाज, जिसमें मस्ती थी, मजाक थे. लेकिन यह दिख रहा था कि धनराज हों या दिलीप, जुगराज हों या विरेन, दीपक ठाकुर हों या प्रभजोत… उस खेल से प्यार अब भी उतना ही है. धनराज ने कहा भी, ‘यही खेल है, जिसने मुझे धनराज पिल्लै बनाया है. यही खेल है, जिसकी वजह से इतना प्यार मिलता है.’

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