ओवैसी ने किया सवाल- धारा 377-497 अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

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ओवैसी ने किया सवाल- धारा 377-497 अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

ओवैसी ने किया सवाल- धारा 377-497 अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एडल्टरी पर फैसला आने के बाद फिर तीन तलाक का मुद्दा उठाया है.अोवैसी का कहना है कि जब समलैंगिकता और व्याभिचार गैर कानूनी नहीं हैं, तो तीन तलाक में क्यों दंड का प्रावधान है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एडल्टरी पर फैसला सुनाते हुए धारा 497 (A) को खत्म कर दिया और कहा कि एडल्टरी अपराध नहीं होगी.फैसला आने के बाद ओवैसी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा था, बल्कि इसे अलग रखा था. लेकिन कोर्ट ने धारा 377(समलैंगिकता) और 497(एडल्टरी) को असंवैधानिक कहा है. तो क्या अब मोदी सरकार इससे सबक लेते हुए अपने तीन तलाक के असंवैधानिक विधेयक को वापस लेगी?’

The Supreme Court didn’t say Triple Talaaq is Unconstitutional however “set it apart “however Apex Court has mentioned 377 & 497 is Unconstitutional will Modi Government be taught from these judgments and take again their Unconstitutional Ordinance on Triple Talaaq
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) September 27, 2018
अोवैसी ने कहा, ‘तीन तलाक विधेयक को कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए क्योंकि ये फ्रॉड है. विधेयक के पहले पेज में सरकार ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था, बल्कि इसे अलग रखा था. ‘

My opinion is that Triple Talaq ordinance must be challenged in Court as a result of it is a fraud. In first web page of the ordinance,govt says that Supreme Court has termed it unconstitutional however SC did not say any such factor relatively it had simply set it apart: Asaduddin Owaisi pic.twitter.com/d5xNY9CAkq
— ANI (@ANI) September 27, 2018
ओवैसी का कहना है कि इस्लाम में निकाह एक कॉन्ट्रैक्ट है, ऐसे में इसमें कोई आपराधिक प्रावधान नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि तीन तलाक का विधेयक महिलाओं के खिलाफ जाता है. उनका तर्क है कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक है, ऐसे में उन महिलाओं की देखभाल कौन करेगा, जिनके पति जेल में होंगे. उन्होंने इस विधेयक को संविधान की समानता के मूलभूत अधिकार के खिलाफ भी बताया है.ओवैसी का कहना है कि सरकार को तीन तलाक को अपराध घोषित करने के बजाय उन लाखों महिलाओं की मदद के लिए कानून लाना चाहिए, जिनके पति उन्हें बिना तलाक दिए छोड़ चुके हैं.

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